गिरगिट…

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गिरगिट…..
दामन   अपना   आसमाँ   सा   बनाना  आसान   नही ।
अपने  आँचल  में   सूरज , चाँद  और  सितारों  को  एक
साथ   दिल   से   बसाना  कोई   आसान  काम   नही ।।
आजकल लोग अपनी जरूरत से लोगो को गले लगाते है,
अगर अपने मतलब का न हो तो बस उसका गला दबाते है।
वो जो अपने मतलब से तलवे चाटता है अमीरों के रातदिन,
गरीबो को गले लगाना उस दोगेले के बस की बात नही ।।
उसे  पता  है  जीवन  मे  कब  किसका  हाथ  पकड़ना  है ।
अपने    मतलब   से   आज   इसका   और  कल  उसका
इस्तेमाल   करेगा , वो   धरती   सा   धर्यवान   थोड़ी   है,
जो   अपने   धरातल  पर   किसी   का   बोझ   सहेगा ।।
अगर अपना हो मतलब तो वो गधे को भी बाप कहेगा।
 गिरा हुआ इंसान तो अपने मतलब के लिए किसी भी
हद से गुजरेगा,सागर की तरह नदियों को निगलेगा।।
आओ अब इनके जैसा अपने को भी बना लेते है।
ईमानदारी छोड़ कर इनकी जमात में मिल जाते है।
तब जीवन आराम से कट जाएगा,बस तेरे अंदर का
ईमान जो है वो अंदर ही अंदर जरूर मर जाएगा।।
नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).

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