बच्चो  के खेलने के लिए नही बचे शहर में पार्क,पार्को में एकत्र कर रहे सफाई कर्मी कूडा….

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कानपुर नगर, गंदगी के कारण बदनाम हो चुके कानपुर शहर के अधिकारी अभी भी नही चेत रहे है और सडको पर कूडे का ढेर लगा व्यवस्था को मुंह चिढा रहा है। शहर की मुख्य संडकों पर कूडा जमा किया जाता है और उठान समय पर न होने से सडकोंबच्चो  के खेलने के लिए नही . पर कूडा फैल रहा है जिससे राहगीरो को तो परेशानी हो ही रही है साथ ही संक्रमण भी फैल रहा है। नालियों की सफाई नही हो रही है। कूडा आग के हवाले किया जा रहा है। सफाईकर्मी कूडा लेकर सन्नाटे वाली जगहों, गलियों और पार्को में कूडा डाल रहे है।
बच्चो के शारीरिक विकास के लिए खेलो की महत्वता पर आये दिन शहर में कार्यक्रम आयोजित होते है लेकिन कानपुर नगर में सभी मुख्य पार्के इस लायक नही बची कि उसमें बच्चे खेल सकेे। फूलबाग मौदान समाप्त हो चुका है इसी प्रकार अन्य पार्क भी बंद हो चुकी है या कूडे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। शहर की सबसे बडी पार्क जो सात पार्को से मिलकर बनी है बृजेन्द्र स्वरूप पार्क, यहां एक पार्क का सौन्दर्यीकरण हो गया है, दूसरी पार्क में स्टेडियम बना दिया गया है और जो अन्य पार्के बची है उसमें दो में आये दिन प्रदर्शनी या मेला लगता है जिससे पार्क चलने के लायक नही बची वहीं बीएनएसडी शिक्षा निकेतन से लगी पार्क पर वर्षो से पाइप पडे है। कई बार समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद आज तक यहां पडे पाईपो को नही हटाया जा सका है। अब यहां सफाई कर्मचारी गाडियों में कूडा लाते है और फेंकते है। यहां उठने वाली बदबे से बीएनएसडी निकेतन में पढने वाले छात्रों को जहां परेशानी होती है वहीं सक्रंमण का खतरा भी बना रहा है। शहर को साफ रखने का दंभ भरने वाले नगर निगम के अधिकारी अपने कमरो से बाहर निकलना नही चाहते है और शहर की सडकों पर कर्मचारी मनमानी कर रहे है। बीते दिनो कानपुर आये सूबे के मुखिया ने गंदगी देखकर अधिकारियों को फटकार लगायी थी, बावजूद उसके नगर निगम के अधिकारी सो रहे है और कानपुर नगर की साफ सफाई की झूठी रिर्पोट शासन को भेज रहे है जबकि आये दिन समाचार पत्रो में शहर की गंदगी के बारे में खबरे प्रकाशित होती है।
दिखावा बन कर रह गया ग्वालटोली वार्ड में परिवर्तन
कानपुर के ग्वालटोली वार्ड में नगर निगम तथा परिवर्तन संस्था द्वारा सफाई का कार्य शुरू किया गया था, इसके तहत अवैध रूप से नालियों के कब्जो को हटाने का काम किया गया था, लेकिन उसमें पारदर्शिता नही बरती गयी और परिवर्तन संस्था के पदाधिकारियों ने नालियों के कब्जे और मकानो के बाहर बने जीने तुडवाये लेकिन कुछ लोगों पर दया भी दिखायी या यूं कहे तो शायद व उनके मिलने वाले निकल आये। बाजार में केबी मार्केट के बगल में डा0 भाटिया का जीना तोड दिया गया, जिसके नीचे नाली साफ करने की जगह थी वहीं डा0 नवीन सहाय का जीना छोड दिया गया। इसी प्रकार कई घरो के जीने तोड दिये गये जिसके नीचे से नालियों को साफ किया जा सकता था लेकिन उन्हे तोड दिया गया और कुछ घरो के जीनो को छोड दिया गया, वहीं बाजार की कई दुकानों के चबूतरे जो पूरी तरह अवैध बने है और वहां नालियां भी बंद की गयी है उन्हे छोड दिया गया। अभियान के दौरान तो नाली की सफाई हुई वह भी उतनी जितनी तोड फोड हुई लेकिन उसके बाद एक बार भी नालियों की सफाई नही है। गहरी नालियों में सिल्ट भरी है और अब नालियों के खुलने के कारण उठने वाली दुर्गन्ध से लोग परेशान है।
शरद शर्मा संवाददाता 

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