शस्त्रमेव जयते : भीड़तंत्र में धार्मिक गुंडे : – निखिलेश मिश्रा…

••!!•• शस्त्रमेव जयते : भीड़तंत्र में धार्मिक गुंडे ——————••—————— अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव चः अर्थात:- यदि मनुष्य के

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पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव ; नही दीदी, बदले में तीन साड़ियों से कम तो नही लूँगा…

पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव करती सम्पन्न घर की महिला ने अंततः दो साड़ियों के बदले

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सम्बन्ध जब रोटी से शुरू होकर बेटी तक जाते हो तभी जातिगत भेदभाव शून्य माना जा सकता है…

लखनऊ । आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात मन ली जाए तो इसका अर्थ हुआ कि क्या मौजूदा समय मे

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हनुमानजी का यशोगान सुनने के लिए बेचैन श्रीराम द्वारा स्वयं ही हनुमानजी का यशोगान करना…

अपनी कलम । बात तब की है जब भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हो गया था। तब चारों दिशाओं के ऋषि

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मर्दाना कमजोरी के इलाज वाले इश्तेहारों से रँगी हुई है शहर की दीवारें और वो कहते हैं औरते कमजोर हैं…

लखनऊ । महिलाओं को अपने से कम करके आंकना, अपने भोग की वस्तु समझना, बच्चे पैदा करने की मशीन समझना,

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